राजकोषीय अनुशासन के मामले में बिहार अव्वल तो बंगाल है फिसड्डी


'राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक' पर राज्यों में बिहार पहले नंबर पर रहा है. बिहार ने इस मामले में गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे संपन्न राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है. वहीं राजकोषीय अनुशासन के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल का रहा है. यह जानकारी उद्योग संगठन सीआइआइ ने एक रिपोर्ट के माध्यम से दी है.

सीआइआइ ने इस रिपोर्ट में राजकोषीय अनुशासन के पैमाने पर राज्यों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए 2004-05 से लेकर 2016-17 की अवधि में नॉन-स्पेशल कैटेगरी में शामिल 18 राज्यों का 'राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक' (फिस्कल परफॉर्मेस इंडेक्स) तैयार किया. यह सूचकांक चार मानकों- राजस्व व पूंजी व्यय सूचकांक, राज्य के अपने टैक्स की प्राप्तियों का सूचकांक, राजकोषीय व राजस्व घाटे को दर्शाने वाले डेफिसिट प्रूडेंस इंडेक्स और कर्ज सूचकांक के आधार पर तैयार किया गया है.

सीआइआइ के मुताबिक 'राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक' पर मध्य प्रदेश दूसरे और छत्तीसगढ़ तीसरे स्थान पर है. दूसरी ओर महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा जैसे उच्च आमदनी वाले राज्य लगातार इस सूचकांक पर पिछड़ रहे हैं. व्यय की गुणवत्ता के मामले में आर्थिक रूप से समृद्ध राज्यों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है. सीआइआइ का कहना है कि कम आय वाले राज्यों में बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने व्यय में गुणवत्ता बरतते हुए हाल के वर्षो में लगातार राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक पर शानदार प्रदर्शन किया है.

खास बात यह है कि 2004-05 से 2013-14 तक आंध्र प्रदेश का प्रदर्शन इस सूचकांक पर शानदार था लेकिन 2014 में राज्य के विभाजन के बाद वित्तीय संकट के चलते उसका प्रदर्शन खराब हो गया. जिस राज्य का स्कोर 100 अंकों वाले इस सूचकांक पर जितना ज्यादा होता है, उसका प्रदर्शन उतना ही बेहतर माना जाता है. इस सूचकांक पर बिहार का स्कोर 66.5 है जबकि पश्चिम बंगाल का सबसे कम 23.3 है.

वैसे तो 2004-05 के दौरान इस सूचकांक पर उत्तर प्रदेश का औसत स्कोर 55.9 है और यह सातवें नंबर पर है लेकिन वित्त वर्ष 2016-17 में राज्य ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए इस पर 77.3 स्कोर प्राप्त किया जो देशभर में सबसे बेहतर है.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) ने केंद्र और राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का आकलन करने के लिए यह सूचकांक तैयार किया है. सीआइआइ का कहना है कि समग्र राजकोषीय प्रदर्शन सूचकांक केंद्र और राज्यों के स्तर पर बजट की गुणवत्ता को परखने का तरीका है.

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