हिंसा को लेकर EC सख्‍त: घटाया चुनाव प्रचार का समय, अधिकारियों पर कार्रवाई


पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है. जहां पूरे देश में 17 मई तक चुनाव प्रचार होगा, वहीं बंगाल में एक दिन पहले ही चुनाव प्रचार का शोर थम जायेगा. सातवें चरण के लिए अब सभी राजनीतिक पार्टियां गुरुवार रात 10 बजे तक ही चुनाव प्रचार कर पाएंगी. राज्य में हो रही हिंसा के मद्देनजर चुनाव आयोग ने आर्टिकल 324 का इस्तेमाल किया.

इधर चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के कई अधिकारियों पर हिंसा को लेकर कर्रवाई की है. एडीजी सीआईडी राजीव कुमार को हटाकर गृह मंत्रालय भेज दिया गया, वहीं प्रधान सचिव, स्वास्थ्य सचिव को भी उनके पद से हटाया गया. मुख्य सचिव को गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गयी है.

ऐसा ही आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने दिया है. गौरतलब है कि 14 मई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो पर हुए हमले के बारे में केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक अजय नायक व विशेष पुलिस पर्यवेक्षक विवेक दूबे से रिपोर्ट मांगी थी. 

विशेष पर्यवेक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस घटना में पुलिस ने 100 लोगों को हिरासत में लिया था, जिसमें से 58 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं, पिछले 24 घंटे में विभिन्न राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने आयोग से मिल कर यहां की कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की है और उनका आरोप है कि यहां कानून-व्यवस्था चरमरा गई है. 

चुनाव प्रचार के दौरान हो रही इस प्रकार की हिंसक घटनाओं से मतदाताओं में डर का माहौल फैलता जा रहा है, अगर यह जारी रहता है तो इससे 19 मई को होनेवाले मतदान पर इसका प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए आयोग ने अपने अधिकारों का प्रयोग किया है. 

आयोग ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि चुनाव आयोग संविधान के आर्टिकल 324 के अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए चुनाव प्रचार करने के समय में एक दिन की कटौती की है और अब सातवें व अंतिम चरण के लिए गुरुवार की रात 10 बजे तक ही चुनाव प्रचार किया जा सकेगा.

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