मायावती की धमकीः हिन्दू धर्म त्याग कर अपना लूंगी बौद्ध धर्म

 
 
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने आज भाजपा को ‘खुली चेतावनी’ देते हुए कहा कि अगर उसने दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के प्रति अपनी सोच नहीं बदली तो वह हिन्दू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लेंगी। मायावती ने यहां पार्टी की एक रैली में कहा कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने हिन्दू धर्म की वर्ण व्यवस्था के तहत दलितों और दबे-कुचलों के साथ भेदभाव की परिपाटी को देखकर तत्कालीन शंकराचार्यों और संतों से मजहबी व्यवस्था की इन कमियों को दूर करने का आग्रह किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी कारण अम्बेडकर ने अपने निधन से कुछ समय पहले नागपुर में अपने अनुयायियों के साथ हिन्दू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया था। इसके बावजूद हिन्दू धर्म की कमियों को दूर नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भाजपा को खुली चेतावनी देती हूं कि अगर उन्होंने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों तथा धर्मान्तरण करने वाले लोगों के प्रति अपनी हीन, जातिवादी और साम्प्रदायिक सोच नहीं बदली तो मुझे भी हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला लेना पड़ेगा।’’ बसपा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसा करने से पहले वह शंकराचार्यों, धर्माचार्यों तथा भाजपा के लोगों को अपनी सोच बदलने का मौका दे रही हैं। नहीं तो अंत में और उचित समय पर वह भी अपने करोड़ों अनुयायियों के साथ हिन्दू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म की दीक्षा ले लेंगी।

मायावती ने भाजपा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जातिवादी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए हैदराबाद में रोहित वेमुला कांड और गुजरात में ऊना कांड कराने का आरोप लगाया। बसपा अध्यक्ष ने भाजपा पर हाल में जातीय संघर्ष का शिकार हुए सहारनपुर जिले के शब्बीरपुर गांव में पहुंचने पर उनकी हत्या की साजिश रचने का भी इल्जाम लगाते हुए कहा कि इस जातीय संघर्ष के पीछे भाजपा का राजनीतिक मकसद था। मायावती ने कहा कि जब उन्होंने इस मामले को राज्यसभा में उठाने की कोशिश की तो उन्हें बोलने नहीं दिया गया। जिसके बाद उन्होंने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के नक्शेकदम पर चलते हुए राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों ने दलित वोट में अपनी पैठ बनाने के लिये संघ से जुड़े एक दलित को राष्ट्रपति बना दिया। मजबूरी में कांग्रेस और विपक्ष को भी दलित को अपना उम्मीदवार बनाना पड़ा।

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