दार्जिलिंग के चाय बागान मजदूरों के बोनस का मुद्दा अधर में


दार्जिलिंग के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों को इस साल बोनस मिलने का निर्णय अभी अधर में ही लटका दिख रहा है क्योंकि पहाड़ी इलाकों में चली लंबी बंदी के बाद प्रबंधन, कर्मचारी और श्रमिक संगठनों के बीच बातचीत के द्वार लगभग बंद हो गए हैं। दार्जिलिंग टी एसोसिएशन (डीटीए) के चेयरमैन विनोद मोहन ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अंशधारकों के बीच श्रमिकों के बोनस के मुद्दे पर बातचीत नहीं की जा सकती है क्योंकि इलाके में बंद जून की शुरूआत में ही शुरू हो गया था।’’

मोहन ने कहा कि हालांकि कंपनियां कानूनी तौर पर बोनस का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं भले ही बंद के कारण चाय के बागानों में काम बंद रहा हो। दार्जिलिंग के चाय बागानों में करीब एक लाख श्रमिक काम करते हैं जिसमें से करीब 55,000 को सीधे रोजगार मिला है। डीटीए के अनुमान के मुताबिक बंद की वजह से करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

एसोसिएशन ने इसके लिए वाणिज्य मंत्रालय और चाय बोर्ड से भी मदद मांगी है। हालांकि इसी बीच दार्जिलिंग को छोड़कर उत्तर बंगाल के अन्य चाय बागान मजदूरों के बोनस के मुद्दे पर कल से बातचीत शुरू हुई है जो आज समाप्त होगी। मोहन ने कहा कि दार्जिलिंग और दुआर के बागान मजदूरों को समान बोनस दिया जाता है।

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